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अंदर के रावण का क्या?

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बाहर के रावण को जलाने से, कुछ ना होगा। दहन तुम्हें अंदर के रावण का, करना होगा। एक दिन दशहरा मना लेने से, कुछ ना होगा। यहां तुम्हें हर दिन दशहरा मनाना होगा।। राम बेचारा करे भी तो, क्या करे वो तो आसा और डेरे वालों से शर्मिंदा। जरा नज़रें घुमा के देखो तो  साहब, हर दिन सीता का हरण होता है हर गली में रावण जिंदा है।। राम बेचारा क्या करे, वो तो शर्मिंदा है। कैसे कह दूं कि सीता सुरक्षित है, और फूल अमन के यहां खिल जायेंगे। जो निकलोगे ढूंढने तो, राम के भेष में कई रावण मिल जायेंगे।। नहीं चाहता विद्रोही मर्यादा पुरुषोत्तम का अपमान करना। लेकिन सच कहता हूं, मुश्किल हो गया है आज राम और रावण कि पहचान करना।। विनोद विद्रोही नागपुर दिल से बुराई पर अच्छाई की जीत का संकल्प करें। विजयदशमी की आपको और आपके परिवार को ढेरों शुभकामनाएं।💐💐 जय श्रीराम

मुंबई के एल्फिंस्टन स्टेशन पर मारे गये लोगों को श्रधांजलि।

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माना यूं तो जिंदगी गुजरती ही है भाग-दौड़ में। पर दुख होता है जब ये ख़त्म हो जाती है भगदड़ में।। विनोद विद्रोही मुम्बई के एल्फिंस्टन स्टेशन पर भगदड़ में मारे गये लोगों को अश्रुपूर्ण श्रधांजलि।

विनोद विद्रोही की पाकिस्तान को चेतावनी...

मां भारती के लाल को शत शत नमन...

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फिरंगियों कि जड़े हिला दी, फर्ज को अपने तत्पर समझा। गुलामी कि बेड़ियों के बदले, सूली पर चढ़ जाना बेहतर समझा।। कुर्बान हुआ वो वतन पर, वो वतन के लिए ही बना था। धन्य है वो मां, धन्य है वो कोख जिसने उस जैसा सपूत जना था।। वंदे मातरम के जयकारे से, सराबोर ये सारा जगत हो जाये। हे मां भारती आशीष दो, देश की युवा पीढ़ी भगत हो जाये।। विनोद विद्रोही मां भारती के अमर सपूत शहीद भगत की जयंती पर उन्हें शत शत नमन। वंदे मातरम..जय हिन्द।

सुना है पाकिस्तान आतंकवाद से पीड़ित है...

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चोरी का ढिंढोरा सबसे पहले चोर ही पीटता है। सुना है पाकिस्तान ने कहा है की वह आतंकवाद से पीड़ित है।। विनोद विद्रोही नागपुर (7276969415) #व्यंग्य #आतंकवाद #पाकिस्तान #यूएन

इस ताज्जुब पर मुझे ताज्जुब है...

आज सुबह घर से बाहर जाने के लिये तैयार हो रहा था की टेबल पर रखा फोन गुर्राने लगा। देखा तो दिल्ली के एक दोस्त का फोन था। दरसल इस दोस्त से एक बार ही मिला हूं वो भी 10 साल पहले अलीगढ़ यूनिवर्सिटी की एक कार्यक्रम में मुलाकत हुई थी। आज अचानक उसका फोन देख उतनी हैरानी नहीं हुई जितनी हैरानी उससे बात करने के बाद हुई। शुरुआत में हाल-चाल और इधर उधर की बात के बाद उसने कहा... "यार आजकल तुम्हारे पोस्ट फ़ेसबुक पर पढ़ते रहता हूं। तुम्हारी हिंदी काफ़ी अच्छी है। लेकिन इस बात पर बड़ा ताज्जुब है की तुम तो नागपुर रहते हो जो महाराष्ट्र में आता है, फ़िर इतनी अच्छी हिंदी कैसे सीख गये।" दोस्त कि यह बात सुनकर मुझे उससे ज्यादा ताज्जुब हुआ। वहीं मेरा मन 9 साल पहले आईआईटी कानपुर के उस प्रोग्राम में चला गया जहां एक वाद-विवाद स्पर्धा के कार्यक्रम में संचालक ने भी मुझे मजाक में ही सही लेकिन कहा था "काफ़ी हैरानी और खुशी की बात है कि नागपुर महाराष्ट्र से भी कोई हिंदी स्पर्धाओं का प्रतिनिधित्व कर रहा है" दोस्तों ताज्जुब मुझे इस बात पर है की अच्छी हिंदी बोलने पर कोई हैर...

क्या कोई सपने खरीदेगा...

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