इंसानों में पशुता से ज्यादा कुछ बचा नहीं...

इन कांक्रीटी जंगलों में अब पशुओं के लिए कोई जगह नहीं,
वैसे भी इंसानों में पशुता से ज्यादा कुछ बचा नहीं।।
ये वो दर्द है जिसकी कोई दवा नहीं,
बहुत ढूंढा, इंसान तो कोई यहां दिखा नहीं।।
विनोद विद्रोही

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