ख्वाहिशें जुबां पे आकर बेदम हो जाती है...

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ख्वाहिशें जुबां पे आकर बेदम हो जाती है।
ऐसा ही होता है, जब खर्च ज्यादा और कमाई कम हो जाती है।।
विनोद विद्रोही
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