यूं थूक कर कब तक चाटोगे...?

बदजुबानी की सीमाएं लांघो, फ़िर कहो कुछ हुआ ही नहीं।
पहले थूको फ़िर चाटो ऐसे जैसे किसी को दिखा ही नहीं।
विनोद विद्रोह

नोट: उपरोक्त पंक्तियों को संदीप दीक्षित द्वारा सेनाध्यक्ष पर दिये बयान से जोड़कर ना देखें।

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