लड़ते आये हो, यूं ही लड़ते रहोगे...

जब तक बिके हुये चैनलों
और अखबारों को पढ़ते रहोगे।
लड़ते आये हो और यूं ही
सदा  लड़ते रहोगे।।

क्या रखा है झगड़े वाली
इन बातों में।
सरकारें आती-जाती रहती हैं,
ये सोचो क्या बदलाव
आया तुम्हारे हालातों में।।

सरकारों का काम आवामों में,
नफ़रतों के बीज बोना होता है।
कोई मसीहा नहीं यहां विद्रोही,
सबको अपना बोझ खुद ही ढोना
होता है।।

विनोद विद्रोही

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