ना पाओगे कलम विद्रोही की चरण-चुम्बन की भाषा में...

सत्ता के ठेकेदारों अपनी खैर मनाओ,
गर मिली है कुर्सी तो कुछ कर के दिखाओ।
ना रहना कभी किसी प्रलोभन
या किसी आशा में ।
कभी ना पाओगे कलम विद्रोही की चरण -चुम्बन की भाषा में।।
विनोद विद्रोही

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