अभिव्यक्ति की आजादी से मुझे कोई बैर नहीं...

पहले आजादी मिली है, फिर ये अभिव्यक्ति मिली है,
किसी की ठेकेदारी में नहीं ये राष्ट्रभक्ति मिली है।
आज तुम्हारी जुबां को ये जो शक्ति मिली है,
खून का कतरा-कतरा बहाकर गुलामी की बेड़ियों से मुक्ति मिली है।।

अभिव्यक्ति की आजादी से मुझे कोई बैर नहीं,
लेकिन अभिव्यक्ति की आड़ में देश बांटने वालों की खैर नहीं।
देश के होकर भी जो बोह रहे एक और बंटवारे की फसलें हैं,
मेरी नज़रों में वो कोई और नहीं, जिन्ना की नस्लें हैं।।

विनोद विद्रोही

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