बेशर्मी की इंतेहा देखो, फिर भी हम जिए जा रहे हैं...

बात में कोई दम नहीं फिर भी किए जा रहे हैं।
आखिर कौन सा गम है जो इतनी पिए जा रहे हैं।।
उनसे कहा था मत जाओ छोड़कर मर जाएंगे,
बेशर्मी की इंतेहा देखो, फिर भी हम जिए जा रहे हैं।।
विनोद विद्रोही

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