घोड़ों की घास चर गए गधे....

जो खुद के समझ रहे थे घोड़े सधे,
उनकी घास चर गए गुजराती गधे।
दो पंक्तियों की ये कथा बहुत कुछ बताती है,
खुद पर गुमान करने वालों को आईना दिखाती है।।
विनोद विद्रोही




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